Thursday, March 20, 2008

जमशेदपुरिया : भाग ७

जमशेदपुर के लोग और उनके द्वारा बोले जाने वाले विशेष उच्चारण और शब्दों का अनूठा संगम!
गौर फरमायें इन सारे वाक्यों पर, अब का तो नहीं पता, पर १९७० और ८० के दशक तक तो लोग ऐसे ही बोलते थे, संभव है कि अंग्रेज़ी माध्यम की पढ़ाई और टीवी के व्यापक प्रसार से अब इस तरह के भाषा का प्रयोग सीमित हो गया हो, पर हमारे समय में तो लोग इसी तरह से बोलते थे -
भक बे,
धत्त तेरे की,
ऐ ल्ले,
का कर रा बे,
भक साला चुप्प,
तभी से तेरे को देख रा,
तेरे को बहुत देर से बर्दाश्त कर रा,
का बे, बड़ी मस्ती हो रा का तेरे को?
 घबराइये नही, मैं आपको ऐसा कुछ भी नही कह रहा हूँ ! बल्कि हो सकता है कि अगर आप जमशेद्पुरिया हैं, तो शायद मुझे अबतक अपने मन में ही सही, अब तक कुछ ऐसा कह बैठे होंगे!


आज मैं जमशेदपुर के लोगों के बीच होने वाली कुछ ऐसे वाक्यों का उल्लेख कर रहा हूँ जो उनके द्वारा ऐसे वक्त प्रयोग होते हैं जब वो बिल्कुल व्यथित हो जाते हैं।

 मसलन, आप कतार में बहुत देर से खड़े हैं और अचानक टिकट खत्म हो गया तो अनायास ऐसे कुछ वाक्य स्वतः आपके मुख विन्दु से निकल पड़ेगा।

वैसे उधोलिखित वाक्यों का प्रयोग बहुत ही संयमित लोगों के द्वारा ऐसे अवसरों पर किए जाने की संभावना है, अन्यथा आप के कर्ण द्धार में, कुछ ऐसे शब्दों का प्रवेश हो जाना लाजमी है, जिसका प्रयोग शायद आप करते हो या न हों, पर  जमशेदपुर में कुछ दिनों के बाद, आप उन शब्दों से जरूर परिचित हो जायेंगे- मेरा तात्पर्य, जमशेदपुर के बहुत सारे "उपयोगी" अथवा उपयोग में आने वाले - गालियों - से है।